Tuesday, 21 October 2014

Takraar

वह कहती है बहुत झगड़ते हो तुम।
कोई समझाए उन्हें ऐ ग़ालिब,
तक़रार भी तो प्यार की निशानी होती है।

Mehfuz

छीना था जो तुमने खुद को मुझसे,
यादों में मैंने तुम्हे फिर पाया।
आँसू जो लिख गए थे ज़िन्दगी में,
मुस्कुराहटों से मैंने उन्हें मिटाया।
चंद तस्वीरों, तोहफों, चिट्ठियों के मोहताज नहीं तुम,
जब तक मैं हूँ, मेरी साँसे हैं, मुझमें मेहफ़ूज़ हो तुम।

Nishabd

आज स्याही सूखी सी है,
कागज़ की सतह भी रूखी सी है।
आज कलम भी डगमगा रही है,
मानो ये मुझसे कहे जा रही है -
"उनके लिए कुछ लिख पाओ, अभी तुम में वह बात नहीं। "
"उनकी तारीफ़ कर पायें, किसी अलफ़ाज़ की वह औकात नहीं। "

Barsaat

है मौसम सुहाना आज, जो बरसात होती तो क्या बात होती।
वह जो मासूम सी चिड़िया कुछ दूर चहक रही है,
वह जो नटखट सी बिल्ली उसे परेशान कर रही है,
यह लैपटॉप मेरा जो तुम्हारी तस्वीर दिखा रहा है,
आज हर ज़र्रा मुझसे ये कहे जा रहा है,
समां तो है सुहाना पर फिर भी एक कमी है,
जो तुम साथ होती तो क्या बात होती।

शरमा कर तुम तो कह दोगी पढ़ने दो मुझे,
हाँ भुगत रही हूँ आज जो साल भर किये मज़े।
पर दिल तुम्हारा भी कहता है क्या रखा है इन किताबों में,
डूबने का मन तुम्हारा भी है कुछ फ़िज़ूल ख्वाबों में।
बेपरवाह भीगने को तरस रही हो तुम भी,
खुद से कहती हो तुम भी, जो बरसात होती तो क्या बात होती।

Anchaahaa Kaam

जो कभी लिखता था मैं अपने ही लिए तो बात थी,
अब शब्द मेरे, शायरी मेरी, पर मैं ही अपना ना रहा।

Waapasi

आज थके से कदम फिर चल उठे,
ये थकी सी रूह भी जाग उठी।
आज सबसे दूर जा रहा हूँ मैं,
आज अपने पास आ रहा हूँ मैं।

आज कंधे ज़िम्मेदारियों से नहीं, सामान से झुके हैं।
आज दिलो दिमाग चाहतों की पकड़ से छूटे हैं।
आज सांस लेने के लिय बाहें खुली हैं।
आज मेरे लिए सारी मंज़िलें, सारी राहें खुली हैं।

आज कम हसने पर कोई नहीं टोकेगा।
आज मनचाहा काम करने से कोई नहीं रोकेगा।
यारों की मस्ती से दूर, आज सब खामोश है।
इन्ही खामोशियों में हाल मदहोश है, चाल मदहोश है।

माना गिनती के हैं ये दिन,
मगर आज ज़ेहन इस बात से बेअसर है।
तन्हाइयों की रात जल्द ही काटने आएगी,
मगर अभी तो वक़्त है, ये तो सिर्फ सेहर है। 

Behne Do...

खोलने दो ये दरवाज़े, खोलने दो ये खिड़कियाँ,
क़ैद नहीं कर सकती मुझे अब ग़म की ये सिसकियाँ।
ना रोको मुझे सवालों में, ना मांगो कोई जवाब,
बस बहने दो यूँ ही मुझे, जहाँ मेरी ख्वाहिशें, जहाँ मेरे ख्वाब।
लड़ना ही है तो लड़ूंगी मैं,पेड़ पत्तों पहाड़ों से,
कहना है जो वह कहूँगी मैं,इन सवाली हज़ारों से।
वह सूरज भी आज अपनी आँखें छुपायेगा,
बादलों के दामन तले आज वह बेबस देख पायेगा।
करना है जो वह करुँगी मैं,आज ये जहां मेरा,
गर है हिम्मत किसी में तो आये सामने, आज ये मैदान मेरा।
आज़ाद घूमूँगी मैं आज, मिट्टी, बूँदें, पत्ते दामन में लिए,
कुछ बिसर जाए तो क्या? तरस गयी थी रूह मेरी ऐसी हिमाकत के लिए।
आज खुदी मेरी बुलंद, आवाज़ में ज़ोर काफ़ी है,
अभी तो बस शुरुआत है, अभी तो कहना बाकी है, अभी तो बहना बाकी है।

Biti Baatein, Puraani Yaadein

बीते हसीन लम्हों की तस्वीर से, ग़म के छीटें पोछ लूँ ज़रा,
तोड़ कर मायूसी की ये क़ैद, जी करता है आज भीग लूँ ज़रा।
बरसते पानी की टिप टिप में उसके कदमों की आहट ढूंढ लूँ,
बहती हवा की हलचल में उस नटखट की शैतानियाँ ढूंढ लूँ।
है जो ये सौंधी सी खुशबू, उसमें उसके होने का एहसास हो,
बन कर एक दबी सी हसी, कुछ छुपे आँसू , वह मेरे पास हो।
जो किया था हसने का वादा आज निभा लूँ ज़रा,
इन हवाओं, बूंदों, खुशबुओं में पा लूँ उसे, आज फिर जी लूँ ज़रा।