खोलने दो ये दरवाज़े, खोलने दो ये खिड़कियाँ,
क़ैद नहीं कर सकती मुझे अब ग़म की ये सिसकियाँ।
ना रोको मुझे सवालों में, ना मांगो कोई जवाब,
बस बहने दो यूँ ही मुझे, जहाँ मेरी ख्वाहिशें, जहाँ मेरे ख्वाब।
लड़ना ही है तो लड़ूंगी मैं,पेड़ पत्तों पहाड़ों से,
कहना है जो वह कहूँगी मैं,इन सवाली हज़ारों से।
वह सूरज भी आज अपनी आँखें छुपायेगा,
बादलों के दामन तले आज वह बेबस देख पायेगा।
करना है जो वह करुँगी मैं,आज ये जहां मेरा,
गर है हिम्मत किसी में तो आये सामने, आज ये मैदान मेरा।
आज़ाद घूमूँगी मैं आज, मिट्टी, बूँदें, पत्ते दामन में लिए,
कुछ बिसर जाए तो क्या? तरस गयी थी रूह मेरी ऐसी हिमाकत के लिए।
आज खुदी मेरी बुलंद, आवाज़ में ज़ोर काफ़ी है,
अभी तो बस शुरुआत है, अभी तो कहना बाकी है, अभी तो बहना बाकी है।
क़ैद नहीं कर सकती मुझे अब ग़म की ये सिसकियाँ।
ना रोको मुझे सवालों में, ना मांगो कोई जवाब,
बस बहने दो यूँ ही मुझे, जहाँ मेरी ख्वाहिशें, जहाँ मेरे ख्वाब।
लड़ना ही है तो लड़ूंगी मैं,पेड़ पत्तों पहाड़ों से,
कहना है जो वह कहूँगी मैं,इन सवाली हज़ारों से।
वह सूरज भी आज अपनी आँखें छुपायेगा,
बादलों के दामन तले आज वह बेबस देख पायेगा।
करना है जो वह करुँगी मैं,आज ये जहां मेरा,
गर है हिम्मत किसी में तो आये सामने, आज ये मैदान मेरा।
आज़ाद घूमूँगी मैं आज, मिट्टी, बूँदें, पत्ते दामन में लिए,
कुछ बिसर जाए तो क्या? तरस गयी थी रूह मेरी ऐसी हिमाकत के लिए।
आज खुदी मेरी बुलंद, आवाज़ में ज़ोर काफ़ी है,
अभी तो बस शुरुआत है, अभी तो कहना बाकी है, अभी तो बहना बाकी है।
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