है मौसम सुहाना आज, जो बरसात होती तो क्या बात होती।
वह जो मासूम सी चिड़िया कुछ दूर चहक रही है,
वह जो नटखट सी बिल्ली उसे परेशान कर रही है,
यह लैपटॉप मेरा जो तुम्हारी तस्वीर दिखा रहा है,
आज हर ज़र्रा मुझसे ये कहे जा रहा है,
समां तो है सुहाना पर फिर भी एक कमी है,
जो तुम साथ होती तो क्या बात होती।
शरमा कर तुम तो कह दोगी पढ़ने दो मुझे,
हाँ भुगत रही हूँ आज जो साल भर किये मज़े।
पर दिल तुम्हारा भी कहता है क्या रखा है इन किताबों में,
डूबने का मन तुम्हारा भी है कुछ फ़िज़ूल ख्वाबों में।
बेपरवाह भीगने को तरस रही हो तुम भी,
खुद से कहती हो तुम भी, जो बरसात होती तो क्या बात होती।
वह जो मासूम सी चिड़िया कुछ दूर चहक रही है,
वह जो नटखट सी बिल्ली उसे परेशान कर रही है,
यह लैपटॉप मेरा जो तुम्हारी तस्वीर दिखा रहा है,
आज हर ज़र्रा मुझसे ये कहे जा रहा है,
समां तो है सुहाना पर फिर भी एक कमी है,
जो तुम साथ होती तो क्या बात होती।
शरमा कर तुम तो कह दोगी पढ़ने दो मुझे,
हाँ भुगत रही हूँ आज जो साल भर किये मज़े।
पर दिल तुम्हारा भी कहता है क्या रखा है इन किताबों में,
डूबने का मन तुम्हारा भी है कुछ फ़िज़ूल ख्वाबों में।
बेपरवाह भीगने को तरस रही हो तुम भी,
खुद से कहती हो तुम भी, जो बरसात होती तो क्या बात होती।
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