Tuesday, 21 October 2014

Biti Baatein, Puraani Yaadein

बीते हसीन लम्हों की तस्वीर से, ग़म के छीटें पोछ लूँ ज़रा,
तोड़ कर मायूसी की ये क़ैद, जी करता है आज भीग लूँ ज़रा।
बरसते पानी की टिप टिप में उसके कदमों की आहट ढूंढ लूँ,
बहती हवा की हलचल में उस नटखट की शैतानियाँ ढूंढ लूँ।
है जो ये सौंधी सी खुशबू, उसमें उसके होने का एहसास हो,
बन कर एक दबी सी हसी, कुछ छुपे आँसू , वह मेरे पास हो।
जो किया था हसने का वादा आज निभा लूँ ज़रा,
इन हवाओं, बूंदों, खुशबुओं में पा लूँ उसे, आज फिर जी लूँ ज़रा।

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