आज थके से कदम फिर चल उठे,
ये थकी सी रूह भी जाग उठी।
आज सबसे दूर जा रहा हूँ मैं,
आज अपने पास आ रहा हूँ मैं।
आज कंधे ज़िम्मेदारियों से नहीं, सामान से झुके हैं।
आज दिलो दिमाग चाहतों की पकड़ से छूटे हैं।
आज सांस लेने के लिय बाहें खुली हैं।
आज मेरे लिए सारी मंज़िलें, सारी राहें खुली हैं।
आज कम हसने पर कोई नहीं टोकेगा।
आज मनचाहा काम करने से कोई नहीं रोकेगा।
यारों की मस्ती से दूर, आज सब खामोश है।
इन्ही खामोशियों में हाल मदहोश है, चाल मदहोश है।
माना गिनती के हैं ये दिन,
मगर आज ज़ेहन इस बात से बेअसर है।
तन्हाइयों की रात जल्द ही काटने आएगी,
मगर अभी तो वक़्त है, ये तो सिर्फ सेहर है।
ये थकी सी रूह भी जाग उठी।
आज सबसे दूर जा रहा हूँ मैं,
आज अपने पास आ रहा हूँ मैं।
आज कंधे ज़िम्मेदारियों से नहीं, सामान से झुके हैं।
आज दिलो दिमाग चाहतों की पकड़ से छूटे हैं।
आज सांस लेने के लिय बाहें खुली हैं।
आज मेरे लिए सारी मंज़िलें, सारी राहें खुली हैं।
आज कम हसने पर कोई नहीं टोकेगा।
आज मनचाहा काम करने से कोई नहीं रोकेगा।
यारों की मस्ती से दूर, आज सब खामोश है।
इन्ही खामोशियों में हाल मदहोश है, चाल मदहोश है।
माना गिनती के हैं ये दिन,
मगर आज ज़ेहन इस बात से बेअसर है।
तन्हाइयों की रात जल्द ही काटने आएगी,
मगर अभी तो वक़्त है, ये तो सिर्फ सेहर है।
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